महादेव --हर महामंडल(संसद) की बैठक में चर्चा होती है और नए नियम बनाये जाते है तो पक्षपात का कारण बनते है,
जो घृणा और युद्ध का आधार बनते है...
जो घृणा और युद्ध का आधार बनते है...
और नुकसान सिर्फ प्रकृति का होता है...मासूम जानवर और वृक्षों का नाश होता है...
और बुलाई फिर एक और महामंडल(संसद ) की बैठक ...शांति की संधि के लिए...साम्यता के लिए...!!!
महत्वाकांक्षा, लोभ, लालच, अहंकार, क्रोध पर नियंत्रण की चर्चा पर कोई बैठक नहीं होती है...
इन पर नियंत्रण हो तो किसी बैठक की आवश्यकता नहीं...
इन पर नियंत्रण हो तो किसी बैठक की आवश्यकता नहीं...
ऐसी बैठकों का कोई औचित्य ही नहीं है...साम्यावस्था मन में होनी चाहिए...बैठकों में नहीं...
हे! महर्षि दधिची...मुझ सन्यासी को ऐसी बैठक से दूर ही रखें ...||
महर्षि दधिची -- हे! महादेव, सभी जनों का इन पर नियंत्रण होता तो....सभी शिव ना हो गये होते...??!!
इसलिए मेरी विनती है आप से, की इस महामंडल की बैठक में पधारकर
हम सप्त-ऋषियों एवं आम-जन को धन्य करें|| :-)
(शिव-पुराण)
भगवान् के १०० तर्क, परन्तु भक्त का केवल १...इसलिए तो इन्हें भोले-नाथ भी कहते है...!! :-)
भगवान् के १०० तर्क, परन्तु भक्त का केवल १...इसलिए तो इन्हें भोले-नाथ भी कहते है...!! :-)